एंग्जायटी (दुश्चिंता)के शिकार हो रहे युवा प्रतिमाह 800 से 1000 मरीज जिला अस्पताल में आ रहे ज्यादातर अवसाद , बेचनी ,नीद की कमी, एंजाइटी के पीड़ित युवाओं में धैर्य की कमी डॉ0 ए.के.दूबे मनोचिकित्सक

युवाओं में धैर्य की कमी और भविष्य की चिंता के कारण बढ़ रहे हैं अवसाद, जिसके कारण नशे की लत के शिकार हो रहे है युवा , विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मानसिक रोगों में डिप्रेशन विश्व में हार्ट अटैक के बाद मृत्यु का दूसरा बड़ा कारण है। मानसिक रोग पूरी दुनिया में एक महामारी का रूप ले चुका है। ऐसा माना जाता है कि आज चार में से एक व्यक्ति मानसिक अवसाद, मानसिक तनाव का शिकार है।

आईए आज  के अंक में जानते है   एंग्जायटी (दुश्चिंता)के बारे में 

बस्ती जनपद चिकित्सालय के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ए.के.दूबे  से महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करते हैं

            मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉक्टर ए.के.दूबे  

प्रतिमाह लगभग 800 से 1000 तक मरीज जिला अस्पताल बस्ती में आ रहे ज्यादातर अवसाद , बेचनी ,नीद की कमी, एंजाइटी के मरीज ज्यादा आ रहे हैं 

तनाव, दुश्चिंता और अवसाद से लगभग हर व्यक्ति गुज़रता है। किसी को कोई अपना खोने पर, तो किसी को कोई भारी आर्थिक क्षति होने पर इन स्थितियों का सामना करना पड़ता है। इस दौर में लोगों में ज़िम्मेदारियों या काम के बढ़ते दबाव के बीच इस प्रकार की मानसिक समस्याएं देखने को मिल रही हैं। डब्ल्यूएचओ की रिपोर्ट के मुताबिक़ भारत में 5 करोड़ से भी ज़्यादा लोग डिप्रेशन यानी अवसाद के शिकार हैं। वहीं 3 करोड़ से भी ज़्यादा लोग एंग्ज़ाइटी यानी दुश्चिंता के शिकार हैं। दुनियाभर के 36.6 फ़ीसदी आत्महत्या के मामले भारत में आते हैं जिसका प्रमुख कारण ही मानसिक तनाव, दुश्चिंता और अवसाद है।





क्या है एंग्जायटी डिसऑर्डर?

एंग्जायटी एक मेंटल हेल्थ परेशानी है, जिसमें लोग अपने आप को नेगेटिव सोच, बेचैनी, डर और चिंता से घेरने लगते हैं. अचानक हाथ का कांपना, पसीना आना, घबराबट होना, मन में उलझन होना, बिना बात के रोना एंग्जायटी होने के लक्षण हैं. लगातार सही से नींद ना आने पर भी एंग्जायटी की दिक्कत हो सकती है. काफी समय तक इस समस्या में उलझे रहने से आपको हार्ट की भी समस्या हो सकती है.



एंग्जायटी का क्या लक्षण है?

क्या होता एंजायटी अटैक एंजायटी अटैक पैनिक अटैक से काफी अलग होता है। ...एंग्जायटी डिसऑर्डर के लक्षण

लगातार स्माइल कुछ लोग जिन्हें एंजायटी होती है वो इसे दूसरों से छिपाकर रखने की कोशिश करते हैं। ...

चुपचाप रहना कुछ लोग जिन्हें एंजायटी होती है वो चुपचाप रहते हैं। ...

बेचैनी,शरीर में तनाव,पैनिक अटैक,पाचन संबंधी समस्याएं
,सांस लेने में तकलीफ,नर्वसनेस महसूस करते हैं ,एकांत में रहना ...

आजकल आफिस में काम के प्रेशर और बदलती लाइफस्टाइल के कारण लोग एंग्जायटी के शिकार हो रहे हैं। आइए जानते हैं एंग्जायटी को शांत करने के तरीके।



आज के समय में ऑफिस में काम के प्रेशर, पारिवारिक कलह और हेल्थ के कारण लोग एंग्जायटी के शिकार हो रहे हैं। कुछ लोगों में एंग्जायटी की समस्या इतनी बढ़ जाती है कि उन्हें इसका ट्रीटमेंट करवाना पड़ता है। एंग्जायटी के कारण लोग डिप्रेशन का शिकार बन जाते हैं। अगर आप या आपका कोई करीबी छोटी छोटी बातों पर ओवर रिएक्ट करता है या एंग्जायटी की समस्या से परेशान है तो यहां हम बताने वाले हैं एंग्जायटी दूर करने के 5 तरीके, जिन्हें अपनाकर आप एंग्जाइटी से राहत पा सकते हैं। 




एंग्जायटी दूर करने के आसान तरीके 

एंग्जायटी से बचने के लिए आप अपनी दिनचर्या में एक्सरसाइज को शामिल करें। इसके लिए आप जिम ज्वाइन कर सकते हैं और अगर जिम जाने का समय नहीं है तो सुबह और शाम में वॉक करें या साइकिलिंग करें। रोजाना एक्सरसाइज करने से टेंशन कम होती है और एंग्जायटी की समस्या में आराम मिलता है। 

रोजाना लगभग आधे  घंटे मेडिटेशन करे 

एंग्जायटी खत्म करने के लिए आप लगभग आधे घंटे समय निकाल कर मेडिटेशन करना शुरू करें। मेडिटेशन करने से डिप्रेशन की समस्या कम होती है और शरीर स्वस्थ रहता है। मेडिटेशन से मन शांत रहता है और हैप्पी हार्मोंस रिलीज होंगे। आप मन को शांत करने के लिए योगा भी कर सकते हैं। बालासन, उत्तानासन  करने से मन शांत रहता है। समय रहने पर मेडिटेशन आधे घंटे से अधिक बढ़ाएं 

 खाने में हेल्दी फूड्स का इस्तेमाल करे

खाने का असर हमारे स्वास्थ पर पड़ता है, ऐसे में अपना खानपान सुधारें। एंग्जायटी की समस्या से परेशान लोग अपनी डाइट का खास ख्याल रखें और इसमें फल, सब्जियां, बीन्स, नट्स और सीड्स जैसे हेल्दी फूड्स शामिल करें।

 
स्क्रीन और मोबाईल का इस्तेमाल टाइम कम करे 

एंग्जायटी से बचने के लिए अपने स्क्रीन टाइम को कम करें। ऑफिस से घर आने के बाद स्मार्टफोन, कंप्यूटर और टैबलेट से थोड़ी दूरी बना लें। इनके बहुत अधिक इस्तेमाल से तनाव बढ़ सकता है।

 भरपूर नींद -

 अच्छी नींद आपकी आधी मानसिक परेशानी को कम कर सकता है। उचित नींद की कमी या समय पर सोने के लिए संघर्ष करने से आपके मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है, जिससे आपकी एंग्जायटी अटैक की संभावना बढ़ सकती है। इससे बचने के लिए पता लगाएं कि आप पर्याप्त नींद ले रहे हैं या नहीं और अगर ऐसा है, तो अपने स्लीप साइकल में सुधार करें।

शारीरिक श्रम वाले खेल

 शारीरिक श्रम वाले अपने मनपसंद खेल खेलना शुरू करें, इससे स्ट्रेस लेवल कम होता है और आप एनर्जेटिक महसूस करने लगेंगे।

नशे की लत से दूर रहें 

किसी भी प्रकार का नशा आपके दिमाक के नरवस सिस्टम को डाउन कर देता है ,नशे दिमाक की नशो को कमजोर बनाता है किसी भी प्रकार का नशे का असर डायरेक्ट दिमाक पर होता है अतः किसी भी प्रकार का नशा से दूर रहना आवश्यक है शराब ,सिगरेट, गांजा,भांग,अफीम ,नशीली ड्रग्स  दिमाक को कमजोर बनाती हैं 



नशे से बचने के लिए  धैर्य रखे , मेहनत के साथ, रेगुलर मेडिटेशन, शारीरिक व्यायाम, नकारात्मक विचारों के प्रति सोच कम रखें, पॉजिटिव सोच रखे नशे से दूर रहे


 बच्चों को मोबाईल गेम की लत से दूर रखे


 

भाग दौड़ की जिंदगी में मां बाप अपने बच्चो पे काम समय दे पाते है, जिसके कारण बच्चे मोबाईल गेमिंग के लत के शिकार हो रहे है और बच्चो में मानसिक बीमारियां बढ़ रहे है 

ऐसे में अभिभावक को बच्चो पे ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है,बच्चो के साथ समय बिताए मोबाईल का प्रयोग निगरानी में सीमित समय तक करने दे 

किसी भी प्रकार की मानसिक बीमारी के इलाज और काउंसलिंग के लिए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें 

  डॉ0 ए.के.दूबे 

मानसिक रोग विशेषज्ञ,

(जिला चिकित्सालय बस्ती)

संपर्क सूत्र : 9455248843


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