अस्थमा के मरीजों के लिए चेस्ट केयर क्लीनिक बस्ती के डॉ राहुल सिंह बने वरदान, अब तक हजारों मरीजों का कर चुके सफल ईलाज,अब दूरबीन द्वारा फेफड़े की जाँच सुविधा (ब्रांकोस्कोपी) मशीन द्वारा क्लीनिक में मौजूद है , टी.बी. की दवाई निशुल्क उपलब्ध
डाक्टर राहुल सिंह चेस्ट रोग के स्पेशलिस्ट डाक्टर है अब तक कई जिलों के मरीजों का इलाज करके उनके बेहतर स्वास्थ्य को से पुनः निरोगी जीवन प्रदान कर चुके है मरीजों का बेहतर इलाज के लिए जिले के योग्य डाक्टरों में एक अलग ही जगह बना चुके हैं डाक्टर राहुल सिंह , आईए जानते है अस्थमा के बारे में डाक्टर राहुल सिंह से
डाक्टर साहब ने जानकारी देते हुऐ बताया कि अस्थमा एक ऐसी बीमारी है जो धीरे धीरे बढ़ता जाता है समय पर इलाज न होने पर लाईलाज हो सकता है भारत में लगभग 20 मिलियन दमा रोगी हैं। दमा का प्रहार आम तौर पर उम्रदराज लोगों के अलावा 5 से 11 साल के बीच के बच्चों में भी होता है।श्वसन के दौरान, जिस हवा में हम सांस लेते हैं वह नाक, गले और फेफड़ों में जाती है। दमा तब होता है जब वायुपथ फेफड़ों तक बढ़ जाता है और आसपास की मांसपेशियों को आसपास की मांसपेशियों को कसने लगता है। इससे बलगम बनता है जिससे वायुमार्ग अवरुद्ध हो जाता है जो आगे फेफड़ों में ऑक्सीजन की आपूर्ति को रोकता है। इसके फलस्वरूप दमा दौरा से खांसी आदि होती है।बदलते मौसम में फैल रहा वायरल इन्फेक्शन , सास के मरीज सतर्क रहें ,धूल ,मिट्टी , और धुएं से दूर रहने की आवश्यकता होती है
अस्थमा (दमा) के लक्षण:
खाँसी- विशेष रूप से रात के समय हंसी और सांस लेते वक़्त होनाघरघराहट
सांस लेते समय सीटी जैसा आवाज निकलना सांस की तकलीफ और छाती में जकड़न महसूस होना
थकावट- थकान का एहसास होना विभिन्न प्रकार के दमा के लक्षण अलग-अलग होते हैं।
अस्थमा (दमा) होने के कारण
1: आनुवंशिकी कारण – दमा से ग्रसित माता-पिता के बच्चों में दमा होने की संभावना भी बढ़ जाती है
2: मौसमी संक्रमण – जिन लोगों को बचपन में वायरल संक्रमण का खतरा होता है, उन्हें दमा होने का खतरा अधिक होता है।
3 :प्रतिरोधक क्षमता _अहितकार जीवाणु के पर्याप्त रूप से संपर्क में नहीं आने कि वजह से शिशुओं में कमजोर प्रतिरोधी स्थिति उत्तपन होती है और जिस वजह से बाद के वर्षों में बच्चें दमा की चपेट में आ जाते हैं।
4:धूम्रपान एवं धुआं
न सहनेवाले पदार्थ हैं जिनके संपर्क में बार बार आने से फेफड़ों में सूजन हो जाती है हानिकारक तत्वों के कारण नियमित संपर्क धूल , धुआं दमा का कारण बन जाती हैं।
सावधानी व बचाव करके दवा का नियमित रुप से लेकर ही अस्थमा की बीमारी से बचा जा सकता है
अस्थमा वाले मरीजों को वर्तमान में सांस लेने में दिक्कत होती है। इस समय उन्हें फूल वाले गार्डन में नहीं जाना चाहिए, क्योंकि नमी वाले इस सीजन में फूलों से उड़ते पराग कण सांस के साथ व्यक्ति के फेफड़े में जाकर समस्या पैदा कर सकते हैं। अस्थमा के रोगी अपने साथ दवाई जरूर रखें और पानी भरपूर मात्रा में पीएं।
- बच्चों में भी अभी सर्दी-जुकाम के मामले सामने आ रहे हैं। बच्चों को कटी हुई सब्जियां, कटे हुए फल या बाहर के खाने-पीने की चीजों से बचाना चाहिए।
सूप, गुनगुने पानी व ताजे पानी का भरपूर सेवन करना चाहिए।
हाथ की सफाई रखनी चाहिए। बार-बार हाथ साबुन से धोने के लिए प्रेरित करें।
यदि दो दिन में सर्दी-जुकाम ,बुखार ठीक ना हो तो चिकित्सक से संपर्क करें। खुद से कुछ भी दवाईयों का इस्तेमाल बच्चों के लिए नहीं करें। धूल, धुएं,और प्रदूषण युक्त वातावरण में न जाएं
आमजन के लिए उपयोगी सुझाव
सामान्य लोग भी इस मौसम में बाहर जा रहे हैं तो भीड़-भाड़ से धूल एवं धुआं बचना चाहिए।
यदि बाहर निकलें तो हो सके मुंह पर मास्क जरूर लगाएं।
यह कोरोना से ही बचने के लिए हिदायद नहीं है, बल्कि अन्य बीमारियों से बचने के लिए भी जरूरी है। ऐसे मौसम में साफ-सफाई का पूरा ध्यान रखें।
अस्थमा के मरीजों को धूम्रपान बिलकुल छोड़ देना , चाहिए , स्त्रियां खाना पकाते वक्त धूम्र रहित चूल्हे का इस्तेमाल करे ,
बच्चों व बुजुर्गों का सर्दियों में रखे खास ख्याल
अक्सर लोग सर्दियों में पानी कम ही पीते हैं, लेकिन अन्य की अपेक्षा अस्थमा के मरीजों के लिए यह खतरनाक हो सकता है। दरअसल, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से फेफड़ों में बलगम पतला हो जाता है, जिससे यह आसानी से शरीर से बाहर निकल जाता है। दरअसल, बलगम अस्थमा के मरीजों की सांस संबंधी दिक्कतें बढ़ा सकती है।
सावधानी व बचाव करके ही अस्थमा की बीमारी से बचा जा सकता है
अस्थमा के मरीजों को तंबाकू या धूम्रपान से तो बिल्कुल ही दूर रहना चाहिए, क्योंकि ये न सिर्फ अस्थमा की दिक्कतें बढ़ाएंगे बल्कि अन्य गंभीर बीमारियों की वजह भी बन सकते हैं। अस्थमा के मरीजों के लिए यह काफी जरूरी है कि वो अपने हाथ समय-समय पर धोते रहें, ताकि उसके जरिए कोई भी वायरस व गंदगी शरीर में प्रवेश न कर पाए और अस्थमा की परेशानी न बढ़ सके ।
डॉ0 राहुल सिंह
एम.बी.बी.एस., एम.डी. (चेस्ट स्पेशलिस्ट) के. जी.एम.यू. लखनऊ, भूत पूर्व वरिष्ठ चिकित्सक बी. आर. डी. मेडिकल कॉलेज, गोरखपुर
रोग विशेषज्ञ
सांस का फूलना, दमा (अस्थमा) एलर्जी इस्नोफिलिया, टी.बी., खाँसी में खून आना, फेफड़े में मवाद / पानी, निमोनिया, खर्राटा, (स्लीप एप्नीया), आई. एल. डी, पुरानी खाँसी, फेफड़े का कैंसर, छाती से सम्बन्धित रोग शुगर, थायराइड
विशेष सुविधा-
👍दूरबीन द्वारा फेफड़े का जांच (ब्रोंकोस्कोपी)
👍प्रत्येक सोमवार को कम्प्यूटर मशीन द्वारा फेफड़ों की क्षमता की जांच की जाती है
👍टीबी के मरीजों के लिए डाट्स की दवा निशुल्क उपलब्ध है अभी तक सैकड़ों लोगों को टीबी की सरकारी दवाई निशुल्क दिया जा चुका है
👍निमोनिया, इन्फ्लूएंजा का टीका मौजूद है
👍 सोते समय खर्राटो व सीने के घड़घड़ाहट का ईलाज
👍 सीने में होने वाली समस्त रोगों का इलाज
चेस्ट केयर क्लीनिक
जिला अस्पताल बस्ती, गेट नं0-2 के सामने, पीपल के पेड के सामने बस्ती गोरखपुर रोड बस्ती
संपर्क सूत्र - 9936766661 8299627551








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