स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार छापा मारने पर , ग्रामीण प्रैक्टिशनरों ने बैठक कर जताई आपत्ति , कहा हमें झोला छाप न कहकर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवक कहा जाय


 कलवारी, बस्ती । 

कलवारी बाजार स्थित एक निजी होटल में ग्रामीण स्वास्थ्य सेवक वेलफेयर एसोसिएशन की बैठक जिलाध्यक्ष लालजी आजाद की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार की जा रही छापेमारी को लेकर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों ने आपत्ति जताई। एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ प्रेम त्रिपाठी ने कहा गरीबों के लिए ग्रामीण स्वास्थ्य सेवक किसी मसीहा से कम नहीं है।

गरीबों के पास पैसा ना होने की दशा में भी ग्रामीण स्वास्थ्य सेवक लोगों का निशुल्क इलाज करते हैं। कोरोना काल की भयावह स्थिती के बीच में जहां जिले के सरकारी डॉक्टर अपने को असहाय महसूस कर रहे थे उस समय झोलाछाप कहे जाने वाले ग्रामीण स्वास्थ्य सेवक अपनी जान जोखिम में डालते हुए अपना क्लीनिक बंद करके गांव-गांव जाकर ग्रामीणों का निशुल्क इलाज कर रहे थे। उस समय सरकार सहित समाज के हर तबका के लोग ग्रामीण स्वास्थ्य सेवकों को देवदूत का दर्जा दे रहे थे। लेकिन परिस्थितियों बदली तो उत्साह वर्धन को कौन कहे आज जिले का स्वास्थ्य महकमा लगातार छापेमारी कर रहा है।


डॉ जवाहर लाल विश्वकर्मा ने कहा कि स्वस्थ समाज के बिना स्वस्थ भारत की परिकल्पना बेमानी है। डॉ एन के चौहान ने अपने सम्बोधन में कहा कि बस्ती जनपद के कुल आबादी के पैसठ प्रतिशत मरीजों का इलाज ग्रामीण स्वास्थ्य सेवक करते हैं। जिलाध्यक्ष डॉ लालजी आजाद ने कहा कि हमारी मांग है कि सरकार हमें झोला छाप न कहकर ग्रामीण स्वास्थ्य सेवक का दर्जा दे। सरकार के सहयोग से हमारा भी रजिस्ट्रेशन होना चाहिए । योग्यता के आधार पर हमें भी प्रशिक्षित करे। यदि सरकार हमारी मांग मानती है तो हम हर छ: माह में निःशुल्क शिविर आयोजित कर मरीजों की सेवा करेंगे। बैठक को डॉ तोराब खान, डॉ तस्लीम खान, डॉ नूरूल्लाह खान, राम अवतार वर्मा ने भी सम्बोधित किया।

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