विश्व COPD दिवस पर चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टर राहुल सिंह ने दिया युवाओं को जरुरी संदेश , धूम्रपान और नशे से दूर रहे युवा
COPD एक क्रोनिक फेफड़े की बीमारी है जिसमे सास की नालियों में सूजन एवं सिकुड़न आ जाता है जो नरंतर बढाती ही जाती है यह बीमारी सास लेने में रुकावट से शुरू होती है तथा बाद में मरीज को सास लेने में मुश्किल होने लगती है। इसमें वायु पुट्टिकाये (अल्वियोलाई) सख्त हो जाती है तथा ऑक्सीजन एवं कार्बन डाइऑक्साइड का रक्त में आदान प्रदान अवरुधहोने लगता है जबकि क्रोनिक ब्रोंकाइटिस में छोटे तथा बड़े वायु मार्ग में सूजन होती है तथा वे बलगम से भर जाते है जो वायु मार्ग को बाधित कर सास लेने में कठनाई पैदा कर देते है।
बस्ती मेडिकल कालेज के चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉक्टर राहुल सिंह ने copd के विषय में जानकारी देते हुए बताया की ४० करोड़ लोग माध्यम से गंभीर copd से ग्रसित है। यह अकड़ा २०११ में २१ करोड़ था। प्रतिवर्ष लगभग ३० लाख से ज्यादा लोगो की मृत्यु copd के कारण होती है। विश्व में मृत्यु का दूसरा सबसे बड़ा कारण copd है। पूरा विश्व में सबसे ज्यादा लोग भारत में ही copd से मरते है २०३० तक copd विश्व भर में मृत्यु का सबसे बड़ा कारण होगा।
सीओपीडी के कारण : -
copd होने का मुख्य कारण धूम्रपान करना, प्रदूषित वातावरण धूल धुआँ गुर्दे में काम करना और महिलाओ द्वारा चूल्हे पर खाना बनाना है।
लक्षण :-
१. सुखी या बलगम के साथ होने वाली खासी
२. गले में घरघराहट
३. सास लेने में तकलीफ जो काम करने के साथ और भी बढ़ती ह।
४. छाती में जकड़न या खिचाव महसूस करना।
इलाज एवं रोकथाम :-
डॉक्टर राहुल सिंह के अनुसार इसका इलाज कठिन एवं जटिल है परन्तु किसी चेस्ट विशेषज्ञ डॉक्टर के परामर्श से इस बीमारी की प्रगति
को रोका जा सकता है।
१. यही धूम्रपान करते है तो धूम्रपान छोड़ दे।
२. हमेशा सक्रिय रहे ।
३. अपने वजन को नियंत्रित रखे।
४. संतुलित आहार ले जिसमे फल, सब्जियों के साथ प्रोटीन की मात्रा बढ़ाये।
५. डॉक्टर के निर्देशानुसार अपनी औषधिया जैसे इन्हेलर, स्टेरॉयड, तथा एंटीबॉयटिक ले।
६. प्रति वर्ष फ्लू अथवा निमोनिया का टिकाकरण अवश्य करवाए।
७. मौसम परिवर्तन से हमेशा सावधान रहे ठंढ से बचे सर्दी जुखाम होने पर तुरंत उपचार ले।
८. डॉक्टर के संपर्क में बने रहे, अपने स्वस्थ सम्बन्धी समस्याओ और चिंताओं के विषय में डॉक्टर से विचार विमर्श करे।


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