पटाखों के धुएं के प्रदूषण से सांस के मरीजों को होती है गंभीर समस्या ,धूम्ररहित दीपावली मनाएं , डॉoराजन शुक्ला वरिष्ठ छाती रोग विशेषज्ञ

 

                               
        डॉo राजन शुक्ला MBBS,MD चेस्ट स्पेशलिस्ट

पटाखों से न सिर्फ पर्यावरण को नुकसान पहुंचता है, बल्कि इससे निकले वाले धुएं से आपकी सेहत को भी गंभीर नुकसान पहुंचता है। रिसर्च से पता चला है कि आतिशबाज़ी की वजह से इससे निकले वाले कैमिकल्स की वजह से हवा का स्तर बेहद ख़राब हो जाता है। यही वजह है कि हर साल पटाखों को न जलाने की सलाह दी जाती है।  अभी तक इससे होने वाले नुकसानों के बारे में  अधिकतर लोग अनजान  है और आइए जानते हैं कि पटाखों से किस तरह सेहत को ख़तरा रहता है।

- पटाखों की वजह से होने वाले प्रदूषण की वजह से सेहत को कई तरह से नुकसान पहुंच सकता है, जैसे क्रोनिक ब्रोंकाइटिस, अस्थमा, COPD, सर्दी-ज़ुकाम, निमोनिया, लैरिनजाइटिस (वोकल कोर्ड का इंफेक्शन) आदि। यह आपकी सभी श्वसन स्वास्थ्य समस्याओं को भी बढ़ा सकता है।

धूल के कणों में जिंक, सोडियम, लेड, सल्‍फर ऑक्‍साइड और नाइट्रोजन होते हैं. ये गैस सांस नली में जाकर सूजन को बढ़ा सकती है, जिस वजह से अस्‍थमा ट्रिगर कर सकता है. कैडमियम खून की ऑक्‍सीजन ले जाने की क्षमता को कम कर सकता है. इससे पीड़ित व्‍यक्ति एनीमिया का शिकार हो सकता है

पटाखों से खेलने से गंभीर तरह से जलने और अन्य चोटों की संभावना अधिक होती है, ख़ासतौर पर बच्चों के लिए काफी ख़तरनाक साबित हो सकते हैं। इसलिए माता पिता को सलाह दी जाती है कि वे बच्चों को पटाखों के साथ अकेला न छोड़े और फर्स्ट-एड बॉक्स तैयार रखें।

70 फीसदी बच्चे और युवा होते हैं पटाखों से प्रभावित। 

90 फीसदी मामलों में 10 साल तक के बच्चे पटाखों की वजह से बर्न का शिकार होते हैं।     

हर साल 6 लाख से ज्यादा लोगों की मौत होती है    

7वें नंबर पर प्रदूषण की सूची में है भारत, डब्ल्यूएचओ कर चुका है अलर्ट ।  

इन बातों का रखें ध्यान आतिशबाजी के दौरान कमरे व घर की खिड़कियों को ठीक से बंद करके रखें। घर में ही रहें। घर से बाहर जाना जरूरी हो तो एन-95 मास्क का इस्तेमाल करें और अपनी दवाएं नियमित रूप से लेते रहें

डॉo राजन शुक्ला 

MBBS,MD चेस्ट स्पेशलिस्ट 

टीo बीo , दमा, स्वास एवं ह्रदय रोग विशेषज्ञ 

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