परिक्षा का समय नजदीक आने पर स्टूडेंट हो जाते हैं एग्जाम एंजाइटी के शिकार, मनोचिकत्सक की देखरेख में कराए ईलाज, मनोचिकित्सक डॉo एo केo दूबे
डॉoएoकेoदूबे मनोचिकित्सक,न्यूरो एवं मानसिक रोग विशेषज्ञ
आजकल देखा जाता है कि ज्यों ज्यों परीक्षा एग्जाम निकट आता है अधिकतर स्टूडेंट में पढ़ाई को लेकर तनाव मानसिक रूप से बढ़ जाता है जिसके कारण स्टूडेंट में मानसिक अवसाद उत्पन्न होने लगती जिससे वह एंजाइटी (दुषिंता )के शिकार हो जाते है , कभी कभी लगातार अध्ययन करने से भी स्वास्थ्य की तरफ ध्यान नहीं दिया जाता ,जिससे भी अवसाद की स्थिति उत्पन्न हो जाती है
परीक्षा और परफॉर्मेंस को लेकर स्टूडेंट्स के दिमाग में कई बातें घूमती रहती हैं। इस दौरान एंजाइटी और ज़्यादा स्ट्रेस लेने की वजह से टीनएजर्स की मेंटल और फिजिकल हेल्थ पर बुरी तरह असर पड़ता है।
बोर्ड की परीक्षा नज़दीक आने वाली है। ऐसे में यह समय स्टूडेंट्स और उनके पैरेंट्स के लिए बहुत तनावभरा होता है। परीक्षा और परफॉर्मेंस को लेकर टीनएजर्स के दिमाग में कई बातें घूमती रहती हैं। इस दौरान बेस्ट करने के चक्कर में कई स्टूडेंट्स डिप्रेशन का शिकार हो जाते हैं। एंजाइटी और ज़्यादा स्ट्रेस लेने की वजह से टीनएजर्स की मेंटल और फिजिकल हेल्थ पर बुरी तरह असर पड़ता है। ऐसे में अगर आपके बच्चे या आप इस दौर से गुज़र रहे हैं तो इन कुछ बातों का ख्याल रखकर आप एग्जाम में न केवल अच्छा प्रदर्शन करेंगे बल्कि आपकी सेहत पर भी कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा।
क्या है एग्जाम एंजाइटी?
एग्जाम से कुछ दिनों पहले स्टूडेंट्स के अंदर बोर्ड की परीक्षा को को लेकर डर, बेचैनी और घबराहट पैदा हो जाती यही जिसे एग्जाम एंजाइटी कहा जाता है। बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स इसकी वजह से अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाते। कुछ बच्चों को अत्यधिक चिंता और घबराहट की वजह से पैनिक अटैक भी आ जाता है। ऐसे में जरूरत होती है कि इस एंजाइटी से बचा जाए और एग्जाम में बेहतर प्रदर्शन किया जाए।
एग्जाम एंजाइटी में स्टूडेंट्स उठा लेते हैं खतरनाक कदम, इन टिप्स को फॉलो कर तनाव से पाएंगे मुक्ति
अभिभावकों को चाहिए परीक्षा वाले दिन भी सुबह में बच्चे को हल्का-फुल्का व्यायाम करने के लिए प्रेरित करें। वहीं, बच्चे को सलाह दें कि परीक्षा केंद्र में प्रवेश करने से पहले वह कुछ नहीं पढ़ें। दोस्तों से बातचीत करें, लेकिन पढ़ाई के विषय में कोई बात न करें। बच्चे को समझाएं कि परीक्षा से ठीक पहले, खुद को मानसिक रूप से हल्के- फुल्के मूड में रखना जरूरी है। इसके लिए वह दोस्तों के सा हंसी मजाक करे। अगर उसे तनाव महसूस हो तो खुद को याद दिलाए कि यह स्वाभाविक है। परीक्षा के बाद प्रश्न पत्र का पोस्टमार्टम न करें। बच्चे को थोड़ा ब्रेक लेने दें। उसकी पसंद का खेल खेलने दें या प्रोग्राम देखने दें। यदि मन-मस्तिष्क हल्का रहेगा तभी वह आगे की परीक्षा अच्छी तरह से दे पाएगा। यदि किसी विषय का पेपर सही नहीं गया हो तो उसे डांट- फटकार लगाकर डराएं नहीं । इससे बचे हुए विषयों पर भी असर पड़ सकता है। उसे प्यार से समझाएं कि अब अगले पेपर की तैयारी में जुट जाए, जो बीत गया उसे भूल जाए।मन को एकाग्रित करना बताए, सुबह शाम हल्का व्यायाम व योगा अभ्यास को प्रेरित करे , अच्छे व ताजे फलों को आहार में दे , ड्राई फ्रूट्स का सेवन हल्की मात्रा में नियमित रूप से करे, स्टूडेंट पढ़ाई के समय घबराएं नहीं , पॉजिटिव सोच रखे , लक्षण महसूस होने पर तुरंत मनोचिकत्सक से मिल कर इलाज कराए !
नव वर्ष एवं गणतंत्र दिवस की शुभ कामनाएं
कृष्णा मेडिकल सेन्टर निकट टीबी चिकित्सालय बस्ती





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