माइग्रेन के कारण आजकल लोग हो रहे मानसिक तनाव एवं डिप्रेशन के शिकार , समय पर सही ईलाज न होने पर माइग्रेन के कारण बन सकता हैं रोगी के शरीर में अन्य गंभीर समस्या का खतरा ,मनोचिकित्सक डॉoएo केo दूबे ने दिया मरीजों को माइग्रेन से बचाव का सुझाव
आज के समय में बदलते लाइफ स्टाइल और अनहेल्दी डाइट कई बीमारियों की जड़ मानी जाती है। लोग काम के चक्कर में न समय से खा पाते हैं, ना हीं चैन से सो पाते हैं। साथ ही दिन का ज्यादातर समय स्क्रीन पर ही बिताते हैं, जैसे- मोबाइल, लैपटॉप या टेलीविजन । इन्हीं में एक है माइग्रेन की बीमारी, जिसे अधकपारी या अधाशीसी के नाम से भी जाना जाता हैं।
आइए जानते हैं बस्ती जिले के मशहूर मनोचिकित्सक डॉक्टर ए के दुबे से माइग्रेन क्या है, माइग्रेन के लक्षण और उपाय क्या है, इत्यादि।
मनोचिकत्सक ,(न्यूरोलॉजिस्ट) डॉक्टर एo केo दूबेo
माइग्रेन क्या है?(अधकपारी)
माइग्रेन एक तरह का सिरदर्द होता है, जो आमतौर पर सिर के आधे हिस्से में होता है। यह मस्तिष्क में तंत्रिका तंत्र के विकारों के कारण हो सकता है। इस बीमारी में अक्सर सिर में हल्का और तेज कष्टदाई दर्द होता है। लेकिन यह आम सिरदर्द से काफी अलग होता है। यह दर्द किसी भी समय हो सकता है, जिसे बर्दाश्त कर पाना बहुत मुश्किल हो जाता है। यह एक आम स्वास्थ्य विकार है, जो लगभग 5 महिलाओं में से 1 और 15 पुरुषों में से 1 को प्रभावित करता है। माइग्रेन में सिरदर्द की अवधि कुछ घंटो से लेकर कई दिनों तक हो सकती है।
वैसे तो माइग्रेन एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है, जिसमें सिर के एक हिस्से में बहुत तेज दर्द होता है और इसके साथ ही मतली, उल्टी, घबराहट, तेज धड़कन जैसी समस्या भी हो सकती है. लेकिन क्या आप जानते हैं अगर माइग्रेन का सिरदर्द लंबे समय तक बना रहे, तो इससे कई गंभीर स्थितियां भी पैदा हो सकती है. अगर समय रहते माइग्रेन का ईलाज नहीं किया गया तो कैसे यह हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याओं का कारण बन सकता है.
माइग्रेन से होने वाली दिक्कतें
रिसर्च में यह बात साबित हो चुकी है कि माइग्रेन से पीड़ित लोगों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक होने का खतरा अधिक होता है, क्योंकि माइग्रेन और हार्ट अटैक दोनों में ब्लड वेसल्स में खून की सप्लाई ठीक तरह से नहीं हो पाती है और इसके चलते माइग्रेन से मायोकार्डियल इन्फ्रक्शन, हार्ट स्ट्रोक-अटैक और यहां तक की मौत का खतरा भी होता है.
हार्ट अटैक और स्ट्रोक को कैसे बढ़ा सकता है माइग्रेन
एक रिसर्च के अनुसार जिन लोगों को माइग्रेन की समस्या लंबे समय तक रहती है, उनमें हार्ट संबंधी समस्या जैसे दिल का दौरा, हार्ट अटैक या स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थिति का खतरा दोगुना हो जाता है. जर्नल ऑफ न्यूरोलॉजी में प्रिंट हुई एक रिपोर्ट के अनुसार, माइग्रेन का अगर समय रहते इलाज नहीं किया गया तो इसके कारण जानलेवा इस्केमिक स्ट्रोक का खतरा भी बढ़ सकता है. ऐसे में जिन लोगों को लाइट माइग्रेन से लेकर सीवियर माइग्रेन तक है उन्हें अपनी लाइफस्टाइल ठीक करना चाहिए और इस समस्या का जल्द से जल्द निदान करना चाहिए.
माइग्रेन को कैसे कम करें
अब बात आती है कि माइग्रेन की स्थिति को कैसे कम किया जा सके? यदि आपको तेज सिरदर्द होता है, तो उसको ट्रिगर करने वाली समस्याओं के बारे में जानें और उससे बचाव के उपाय ढूंढें, इसके लिए मेडिटेशन एक बेहतर उपाय है.
माइग्रेन की समस्या से बचने के लिए हेल्दी डाइट लें और लंबे समय तक भूखा ना रहे, क्योंकि भूखा रहने से माइग्रेन की समस्या और बढ़ जाती है.
कैफीन का बहुत ज्यादा सेवन करने से भी माइग्रेन का खतरा बढ़ जाता है, ऐसे में चाय, कॉफी और कैफीन युक्त चीजों का सेवन कम करें.
माइग्रेन के नुकसान क्या है?
माइग्रेन जैसी समस्याओं का असर शरीर के कई अंगो पर पड़ता है। इसके कारण होने वाली शरीर की मानसिक और शारीरिक समस्याएं दिन-प्रतिदिन बढ़ती जाती हैं। आइए जानते हैं, माइग्रेन से क्या नुकसान होता है:-
• माइग्रेन शरीर के ब्लड सर्कुलेशन को प्रभावित करता है, जिसके कारण हार्ट अटैक जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।
• यह मानसिक तनाव का कारण भी बनता है, जिसके कारण व्यक्ति को डिप्रेशन हो सकता है।
• यदि ओकुलर माइग्रेन हो तो यह आपकी आखों को नुकसान पहुंचा सकता है, और आंखों में खून का बहाव कम हो सकता है।
• यह आपके हाई ब्लड प्रेशर के खतरे को बढ़ाता है।
• माइग्रेन में एंग्जायटी के कारण अनिद्रा की भी समस्या हो सकती है।
माइग्रेन के प्रकार
वैसे तो माइग्रेन कई प्रकार के होते हैं, उनमें से कुछ निम्नलिखित है:-
• क्रोनिक माइग्रेन - क्रोनिक माइग्रेन में हर महिने 15 दिन से ज्यादा समय तक दर्द शामिल होता है।
• पीरियड्स माइग्रेन - यह माइग्रेन पीरियड्स के दौरान महसूस होते हैं।
• एब्डोमिनल माइग्रेन - एब्डोमिनल माइग्रेन 14 साल के कम उम्र के बच्चों को होता है, जो आंत और पेट के अनियमित कार्य की वजह से हो सकता है।
• वेल्टिबुलर माइग्रेन - माइग्रेन के इस प्रकार में गंभीर चक्कर आना एक लक्षण हैं।
• हेमिप्लेजिक माइग्रेन - इस तरह के माइग्रेन में शरीर के एक तरफ अस्थाई रूप से कमजोरी हो जाती है।
माइग्रेन पोषक किन तत्वों कमी से हो सकता है ?
हमारे शरीर में कुछ पोषक तत्वों की कमी होने पर भी माइग्रेन जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती है। कुछ विटामिन की कमी के कारण माइग्रेन हो सकता है:-
• विटामिन डी - विटामिन डी हमारे पूरे स्वास्थ्य के लिए
बहुत जरूरी है। इसकी कमी से हड्डियां कमजोर हो सकती है और आपको माइग्रेन कि स्थिति का सामना करना पड़ सकता है। इसके लिए आप कुछ देर धूप में बैठ सकते हैं या विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थ का सेवन कर सकते हैं।
• मैग्नीशियम - मैग्निशियम की कमी माइग्रेन का एकप्रमुख कारण होता है। इसकी कमी से तनाव और सिरदर्द जैसी समस्याएं हो सकती है और माइग्रेन का सामना करना पड़ सकता है। इससे छुटकारा पाने के लिए अपने डाइट में मैग्निशियम खाद्य पदार्थ को जरूर शामिल करें।
• विटामिन बी कॉम्प्लेक्स विटामिन बी कॉम्प्लेक्स हमारे शरीर के लिए बहुत जरूरी विटामिन होता है। इसके अंतर्गत विटामिन बी1, बी2, बीउ, बी5, बी6, विटामिन बी12 इत्यादि होते हैं, साथ ही राइबोफ्लेविन और नियासिन भी मौजूव विटामिन बी कॉम्प्लेक्स की कमी से भी माइग्रेन की समस्या हो सकती है।
माइग्रेन होने पर क्या करे
माइग्रेन के लक्षण होने पर तुरंत अच्छे मनोचिकित्सक की देख रेख में इलाज कराएं ,स्वयं के उपचार के चक्कर में न रहे, पेन किलर का प्रयोग जायदे दिन तक शरीर के अन्य अंगों के लिए घातक हो सकता है , घरेलू इलाज के चक्कर में जयादे दिन न रहे डॉक्टर से संपर्क में इलाज कराएं
मनोचिकत्सक, न्यूरोलॉजिस्ट
डॉo एo केo दूबे o
कृष्णा मेडिकल सेंटर
जिला अस्पताल गेट नंबर तीन से 100 मीटर आगे निकट टीo बीo अस्पताल बस्ती
संपर्क सूत्र 94552 48843







Comments