आजकल बाइपोलर डिसऑर्डर की समस्या से ग्राषित हो रहे हैं अधिकांश लोग _ डॉक्टर एoकेo दूबे मानसिक रोग विशेषज्ञ ने दिया सलाह

 


           डॉo एoकेo दूबे मनोरोग चिकित्सक (न्यूरो एवं मानसिक रोग विशेषज्ञ )


बाइपोलर डिसऑर्डर एक ऐसी मानसिक बीमारी है जो डिप्रेशन और मूड स्विंग की वजह बनती है। इस बीमारी से पीड़ित इंसान के मन में उदानी और निराशा बनी रहती है। इस बीमारी से पीड़ित इंसान का बीमारी पर कंट्रोल करना मुश्किल होता है। इस बीमारी से पीड़ित इंसान के मूड में तेजी से बदलाव आते हैं।



बाइपोलर डिसऑर्डर एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है जिसे मैनिक डिप्रेशन कहा जाता है। यदि आपके पास यह है, तो आपका मूड अत्यधिक उतार-चढ़ाव (जिसे उन्माद या हाइपोमेनिया कहा जाता है) और अत्यधिक निम्न अवधि के बीच झूल सकता है। ये सामान्य "उतार-चढ़ाव" नहीं हैं।

बाइपोलर डिसऑर्डर के क्या क्या कारण होते हैं?

किसी व्यक्ति में बाइपोलर डिसऑर्डर, अत्यधिक अवसाद या सिज़ोफ्रेनिया विकसित होने में समान आनुवंशिक 'जोखिम कारक' निहित होते हैं। पर्यावरणीय जोखिम कारक भी हैं, और ये आनुवंशिक जोखिम कारकों के साथ मिलकर आप में इन बीमारियों या स्थितियों के विकसित होने का ख़तरा बढ़ा या घटा सकते हैं।




उदाहरण के लिए, आप में आनुवंशिक जोखिम कारक हो सकते हैं जिसका अर्थ है कि आपको बाइपोलर डिसऑर्डर होने की अधिक संभावना है। हालांकि, यदि आप एक स्थिर और सकारात्मक वातावरण में बड़े होते हैं या रहते हैं, तो यह आप में एक गंभीर मानसिक बीमारी पैदा होने के जोखिम को कम कर सकता है।



बाइपोलर जैसी गंभीर मानसिक बीमारी से ग्रस्त माता-पिता का होना आप में एक गंभीर मानसिक बीमारी विकसित होने का सबसे प्रबल ज्ञात जोखिम कारक है। जिन बच्चों के माता-पिता में से कोई एक, किसी गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित है, उनमें गंभीर मानसिक बीमारी विकसित होने की संभावना तीन में से एक होती है।



बाइपोलर डिसऑर्डर होने के कारणों के बारे में सोचते समय यह याद रखना महत्वपूर्ण है कि इसमें बहुत सारी अलग-अलग चीजें शामिल हैं, और बाइपोलर डिसऑर्डर किसी भी एक जोखिम कारक के कारण नहीं होता है।


बाइपोलर डिसऑर्डर कैसा महसूस क्या जा सकता है ?

अवसाद (डिप्रेशन)

हम सभी समय-समय पर अवसाद की भावनाओं का अनुभव करते हैं4। यह हमारे जीवन में समस्याओं को पहचानने और उनसे निपटने तक में भी हमारी मदद कर सकता है। हालांकि, गहन अवसाद या बाइपोलर अवसाद में, ये भावनाएं बहुत अधिक तीव्र होती हैं। वे लंबे समय तक रहती हैं और जीवन की सामान्य बातों से निपटना मुश्किल या असंभव बना देती हैं। यदि आप अवसादग्रस्त हो जाते हैं, तो आप इनमें से कुछ या सभी बातें महसूस या नोटिस करेंगे:



भावनात्मक परिवर्तन

.अप्रसन्नता की भावनाएं जो दूर नहीं होती।

.महसूस होना कि आप बिना किसी कारण रोना चाहते हैं।

.चीज़ों में दिलचस्पी ख़त्म होना।

.चीज़ों का आनंद न ले पाना।

.बेचैन और उत्तेजित महसूस करना।

.आत्मविश्वास खोना।

.निकम्मा, अयोग्य और हताश महसूस करना।

.सामान्य से अधिक चिड़चिड़ापन महसूस करना।

.आत्महत्या के बारे में सोचना।

आपकी सोच से जुड़ी परेशानियां

आप सकारात्मक या आशावादी सोच नहीं रख पाते।आपको सरल निर्णय लेने में भी कठिनाई होती है।आप पूरी एकाग्रता से काम नहीं कर पाते।

शारीरिक लक्षण

.आप खाना नहीं चाहते और वज़न कम हो जाता है।

 सोना मुश्किल होता है।

.आप बहुत जल्दी उठ जाते हैं – और दोबारा सो नहीं पाते।

.आप एकदम थका हुआ महसूस करते हैं।

.आपको कब्ज़ हो जाता है।

.आप सेक्स में रुचि खो देते हैं।

व्यवहार

चीज़ों को शुरू करना या खत्म करना कठिन होता है – यहाँ तक कि रोज़मर्रा के काम भी।

आप बहुत रोते हैं – या ऐसा लगता है कि आप रोना चाहते हैं, लेकिन रो नहीं सकते।

आप दूसरे लोगों के साथ से बचते हैं।

बाइपोलर डिसऑर्डर का निदान

(Diagnosis of Bipolar disorder) बाइपोलर डिसऑर्डर के लक्षणों को समझने के लिए सबसे पहले चिकित्‍सक रोगी से बात करते हैं। इसके अलावा डॉक्‍टर मरीज के शरीर में अन्य बीमारियों (जैसे, थायरॉइड ग्रंथि की स्थिति) का पता लगाने के लिए एक कम्‍प्‍लीट फिजिकल टेस्‍ट, ब्‍लड टेस्‍ट या बॉडी स्कैन भी करते हैं जिसके माध्‍यम से लक्षणों का पता लगाया जा सके। मेडिकल हिस्‍ट्री, फैमिली हिस्‍ट्री और अन्‍य चल रही दवाओं की लिस्‍ट का भी डॉक्‍टर मूल्यांकन करते हैं। कुछ डॉक्टर लक्षणों को बेहतर ढंग से समझने के लिए परिवार के सदस्यों या मरीज के दोस्तों से भी बात कर सकते हैं। अगर डॉक्टर को बाइपोलर डिसऑर्डर का संदेह होता है, तो व्यक्ति को मेंटल हेल्‍थ केयर प्रोफेशनल की मदद लेने की सलाह दी जाती है। ऐसे प्रोफेशनल्‍स आमतौर पर बाइपोलर डिसऑर्डर के प्रकार की पहचान करने के लिए लक्षणों के पैटर्न और तीव्रता को बारीकी से समझते हैं। लक्षणों में समानता के कारण, बाइपोलर डिसऑर्डर वाले व्यक्तियों को कभी-कभी गलत तरीके से बॉर्डरलाइन व्यक्तित्व विकार या सिज़ोफ्रेनिया के रूप में निदान किया जाता है।


अपना ख्याल रखना संतुलित आहार लें।

बिना चीनी वाले तरल पदार्थों का नियमित रूप से सेवन करें। इससे आपके शरीर के नमक और तरल पदार्थ को संतुलित करने में मदद मिलती है। बहुत अधिक चीनी वाले कोला और शीतल पेय से दूर रहें।

नियमित रूप से भोजन खाएँ - यह आपके तरल संतुलन को बनाए रखने में भी मदद करेगा।

कैफ़ीन के प्रयोग से सावधान रहें – चाय, कॉफ़ी या कोला में। इससे आपको अधिक पेशाब आता है, और इसलिए आपका लिथियम स्तर बिगड़ सकता है।



 बच्चों में बाइपोलर डिसऑर्डर : 

इसे साइक्लोथिमिक डिसऑर्डर (साइक्लोथाइमिया) कहते हैं। बाइपोलर डिसऑर्डर का ये प्रकार बहुत कम लोगों को प्रभावित करता है लेकिन इसकी विशेषता ये है कि अगर इसकी चपेट में कोई व्‍यस्‍क आ जाए तो उन्‍हें ये करीब 2 साल तक परेशान कर सकता है और बच्‍चों और किशोरों में ये एक वर्ष तक रहता है।


लक्षण दिखने पर समय रहते कराए जल्द इलाज

बाइपोलर डिसऑर्डर का इलाज कैसे किया जाता है ?आपके डॉक्टर लक्षणों को नियंत्रित करने के लिए आपको कुछ दवाइयां दे सकते है, जैसे –एंटी साइकोटिक्स, बता दे की ये दवाई आपके लक्षण कंट्रोल करने के लिए काफी सहायक मानी जाती है। मूड स्टेबलाइजर, लक्षण कम करने के लिए जानी जाती है। एंटी डिप्रेसेंट, दवाई के साइड इफेक्ट्स के कारण बहुत कम लोग इसका प्रयोग करते है। एंटी एंजाइटी मेडिसिन, मैनिक एपिसोड्स के रिस्क को कम करती है। पर ध्यान रहें इन दवाइयों का सेवन करने से पहले डॉक्टर से जरूर सलाह लें।

 डॉक्टर एoकेo दूबे मनोरोग चिकित्सक (न्यूरो एवं मानसिक रोग विशेषज्ञ )

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कृष्णा मेडिकल सेन्टर निकट टीबी चिकित्सालय बस्ती 

Mob no 9455248843





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