सिजोफ्रेनिया एक मनोरोग है जो किसी व्यक्ति में मानसिक विकार के बारे में बताता है। समय पर ईलाज होना बेहद जरूरी डॉक्टर एo केo दूबे मनोचिकित्सक एवं ( न्यूरो रोग विशेषज्ञ)
डॉo एo केo दूबे मनोचिकित्सक एवं ( न्यूरो रोग विशेषज्ञ)
सिजोफ्रेनिया एक मनोरोग है जो किसी व्यक्ति में मानसिक विकार के बारे में बताता है। इस विकार से ग्रस्त व्यक्ति को वास्तविकता या फिर अपनी बात जाहिर करने में परेशानी होती है और ये सामाजिक व व्यावसायिक दोनों ही प्रकार से परेशानी का सामना करते हैं।
सिजोफ्रेनिया से पीड़ित व्यक्ति आम तौर पर बिना सोचे समझे कुछ भी कहने और भ्रम जैसी दुविधा में जीते हैं। चूंकि यह एक क्रॉनिक मानसिक बीमारी है इसलिए इसके प्रति वर्ष मामलों की संख्या बहुत कम होती है, लेकिन बहुत सारे लोग वर्तमान में इस स्थिति से पीड़ित हैं। सिजोफ्रेनिया के बारे में समाज के भीतर बहुत सारी गलत धारणाएं मौजूद हैं। सिजोफ्रेनिया से पीड़ित लोग न तो खतरनाक होते हैं और न ही हिंसक होते हैं, इनका बर्ताव सामान्य आबादी की ही तरह समान होता है। हालांकि कई बार ऐसे लोग सामाजिक मनोवृत्ति का शिकार हो जाते हैं।
सही उपचार या रोगी की देखभाल में कमी रोग को बढ़ाने का काम करती है।
सिजोफ्रेनिया एक गंभीर मानसिक बीमारी है, जिसमें व्यक्ति को निरंतर अंतराल पर दौरे पड़ते हैं।
सिजोफ्रेनिया से पीड़ित लोगो को बेहतर जीवन देने के लिए विभिन्न जैव-मनोवैज्ञानिक-सामाजिक रणनीतियों का उपयोग किया जा सकता है।
अच्छी तरह देखभाल , थेरेपी और उपचार से लोग के व्यवहार में बहुत सुधार दे सकता है और वे हेल्दी जीवन जी सकते हैं।
सिजोफ्रेनिया : लक्षण
अकेले में बात करना ,अकेले में हंसना ,बुदबुदाना कान में आवाजे आना,अकेले में हंसना, बेवजह शक होना
आवाजें सुनने का भ्रम
सिजोफ्रेनिया के लक्षणों में सबसे आम है कुछ खास तरह की आवाजों के सुनाई देने का आभास होना। जो कि वास्तव में नहीं होती हैं। जिनमें उन चीजों को देखना, सुनना, महसूस करना, सूंघना या चखना शामिल हो सकता है, जो वास्तव में मौजूद नहीं हैं। सिज़ोफ्रेनिया में आवाज़ें सुनना सबसे आम है।
किसी चीज का भ्रम होना (Delusions)
भ्रम होना वास्तव में वह चीज है जिसका वास्तविकता से कोई संबंध नहीं है। इनमें कुछ तर्कहीन बातें शामिल हो सकती हैं, जिनका सच्चाई से कोई संबंध नहीं होता है। कभी-कभी सच्चाई से संबंधित कुछ और बातें भी व्यक्ति का मन गढ़ने लगता है। जो सुनने में वास्तविक लग सकती हैं। जबकि ये केवल आभासी बातें होती है।
कंफ्यूजन की स्थिति (Disorganized thinking)
सिज़ोफ्रेनिया से पीड़ित लोगों को अक्सर अपने विचारों को व्यवस्थित करने में कठिनाई होती है और वे बिना किसी तर्क के या संबंध के एक विषय से दूसरे विषय पर जा सकते हैं। उनकी कई बातें असंगत हो सकती हैं, जिन्हें माना या उनका अनुसरण नहीं किया जा सकता।
नकारात्मक लक्षण (Negative symptoms)
ये सामान्य भावनात्मक और व्यवहारिक स्थिति है, जिसमें व्यक्ति का कामकाज प्रभावित होता है। नकारात्मक लक्षणों में प्रेरणा की कमी, सामाजिक अलगाव, और आनंद का अनुभव करने में कठिनाई शामिल हो सकती है। इसमें व्यक्ति हर काम को लेकर नकारात्मक महसूस करता है।
संज्ञानात्मक समस्या (Cognitive impairments)
सिजोफ्रेनिया से पीड़ित व्यक्तियों को याद रखने, ध्यान लगाने और समस्या का समाधान करने जैसी क्षमताओं में कमी का अनुभव महसूस हो सकता है
सिजोफ्रेनिया का इलाज व समाधान
अगर शुरुआत में ही इस रोग की पहचान और उसे कंट्रोल किया जाए तो सिजोफ्रेनिया का उपचार काम आ सकता है। दवाओं के साथ सामाजिक और सामुदायिक सपोर्ट उपचार में प्रभावी साबित होता है। मरीजों को अस्पताल या फिर मानसिक स्वास्थ्य संस्थानों में भेजने से इस रोग को बढ़ने से रोकने में मदद मिल सकती है। सिजोफ्रेनिया के लिए दी जाने वाली दवा आमतौर पर बुरे सपने, भ्रम, सनक और भ्रमित सोच जैसे मनोविकार के लक्षणों को कम करने में मदद करती है। सिजोफ्रेनिया के उपचार के लिए बेहद प्रभावी दवाइयां उपलब्ध हैं। यह दवाइयां मनोचिकित्सा के साथ-साथ प्रेरणा की कमी, अभिव्यक्ति की कमी और सामाजिक जुड़ाव में कमी जैसे लक्षणों का इलाज करने के लिए भी उपयोगी साबित होती है। ये थेरेपी तनाव को कंट्रोल कर और कम्युनिकेशन को बेहतर बनाने के साथ-साथ जीवन कौशल को बेहतर बनाने में भी मददगार साबित होती हैं
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डॉo एo केo दूबे मनोचिकित्सक एवं( न्यूरो रोग विशेषज्ञ)
जिला चिकित्सालय बस्ती
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