महिला अस्पताल में संस्थागत प्रसव के प्रति बढ़ा लोगों का रुझान _ डॉo अनिल कुमार मुख्य चिकित्सा अधीक्षक महिला अस्पताल
डॉo अनिल कुमार मुख्य चिकित्सा अधीक्षक
अस्पतालों में प्रशिक्षित मेडिकल स्टॉफ से प्रसव लाभ बनी प्राथमिकता
बस्ती - जिले सहित समूचे देश प्रदेश में संस्थागत प्रसव के प्रति लोगों का रुझान बढ़ रहा है, जिसका अर्थ है कि लोग अब अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में प्रशिक्षित डॉक्टरों से प्रसव लाभ लेना पसंद कर रहे हैं। यह बदलाव स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और लोगों के स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता का परिचायक है। हाल ही में भारत सरकार ने देश में जन्म, मृत्यु और शिशु मृत्यु दर के विश्वसनीय वार्षिक अनुमान का डाटा प्रदान करने वाले प्रणाली नमूना पंजीकरण (एसआरएस) का डेटा वर्ष 2021के लिए जारी किया है, जो तीन साल बाद आया है। रिपोर्ट के अनुसार लोग अब अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में प्रशिक्षित डॉक्टरों से ही प्रसव लाभ को लेकर प्राथमिकता दे रहे हैं। वहीं जन्म अंतराल सही दिशा में होने की पुष्टि रिपोर्ट बया कर रही है, अधिकांश भारतीय तीन या उससे अधिक वर्षों का अंतराल रखकर बच्चों का जन्म कर रहे हैं। साल 2021 में कुल 52.4% बच्चों का जन्म उनके पिछले भाई बहन के तीन साल या उससे अधिक अंतर के बाद हुआ। यह आंकड़ा 2016 में 51.9% था,जबकि 2011 में यह 42% रहा। इस बाबत वीरांगना रानी तलाश कुंवरी जिला महिला चिकित्सालय बस्ती के
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ० अनिल कुमार से मीडिया टीम ने बात किया तो उन्होंने इसका श्रेय ग्रासरूट पर आशा बहू, ए०एन०एम० व आंगनवाड़ी कार्मिकों के संयुक्त टीम प्रयास तथा जननी सुरक्षा योजना सहित प्रधानमंत्री मातृत्व लाभ योजना जैसी लाभपरक योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से संभव हो सका। गौरतलब हैं कि नमूना पंजीकरण प्रणाली (एसआरएस) एक जनसांख्यिकीय सर्वेक्षण है जो भारत में राष्ट्रीय और उप-राष्ट्रीय स्तर पर जन्म, मृत्यु और शिशु मृत्यु दर जैसे प्रजनन और मृत्यु दर के संकेतकों का अनुमान लगाने के लिए किया जाता है. यह प्रणाली दोहरी रिकॉर्डिंग पर आधारित है, जहां जन्म और मृत्यु को पहले एक अंशकालिक गणनाकर्ता द्वारा और फिर एक पूर्णकालिक पर्यवेक्षक/सरकारी अधिकारी द्वारा स्वतंत्र रूप से रिकॉर्ड किया जा रहा है।

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