उद्घाटन के तीन दिन में ही फ्यूज हुए कई बल्ब,डेकोरेटिव पोल लाइट घोटाला उजागर, शहर वासियों को नए साल की सौगात फीकी पड़ी बस्ती वासियों को
-सुंदर बस्ती–स्वच्छ बस्ती के दावे पर सवाल, नगर पालिका व कार्यदायी संस्था पर भ्रष्टाचार के आरोप
बस्ती। नगर पालिका बस्ती द्वारा शहर को सुंदर और स्वच्छ बनाने के उद्देश्य से लगाए गए डेकोरेटिव पोल लाइट अब खुद सवालों के घेरे में आ गए हैं। 31 दिसम्बर को बड़ेवन से कंपनीबाग तक लगाए गए इन डेकोरेटिव पोल लाइटों का भव्य उद्घाटन पूर्व सांसद हरीश द्विवेदी एवं नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिनिधि अंकुर वर्मा सहित दर्जनों भाजपा नेताओं की मौजूदगी में किया गया था। उद्घाटन के समय इसे नगर पालिका की बड़ी उपलब्धि बताते हुए “सुंदर बस्ती–स्वच्छ बस्ती” का नारा दिया गया, लेकिन मात्र तीन दिन में ही हकीकत सामने आ गई।
शहरवासियों का कहना है कि कई डेकोरेटिव पोल लाइटों के बल्ब तीन दिन के भीतर ही फ्यूज हो गए। इससे न सिर्फ नगर पालिका के दावों की पोल खुल गई, बल्कि कार्यदायी संस्था की गुणवत्ता और ईमानदारी पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस पूरे कार्य में भारी भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी हुई है, जिसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है।
स्थानीय व्यापारियों और राहगीरों ने बताया कि जिस सड़क को रात में रौशनी से जगमग करने का सपना दिखाया गया था, वहां अब कई जगह अंधेरा पसरा हुआ है। लोगों का कहना है कि यदि उद्घाटन के कुछ ही दिनों में लाइटें खराब हो जाएं, तो आने वाले समय में इनका क्या हाल होगा, इसका अंदाजा लगाया जा सकता है।
नगर पालिका पर यह भी आरोप लग रहे हैं कि घटिया क्वालिटी के सामान का इस्तेमाल किया गया, ताकि कमीशन का खेल खेला जा सके। नागरिकों का कहना है कि सरकारी धन से किए गए इस कार्य में गुणवत्ता से समझौता किया गया है, जो सीधे तौर पर जनता के साथ धोखा है।
इस मामले को लेकर नगरवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। कई सामाजिक संगठनों ने मांग की है कि पूरे मामले की जांच कराई जाए और दोषी अधिकारियों व कार्यदायी संस्था के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस तरह के मामलों पर लगाम नहीं लगाई गई, तो विकास के नाम पर सिर्फ भ्रष्टाचार ही फलता-फूलता रहेगा।
अब देखना यह है कि नगर पालिका प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और “सुंदर बस्ती–स्वच्छ बस्ती” का नारा हकीकत में कितना सार्थक साबित होता है।

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