हम हीरो कहलाते हैं, पर हकीकत ये है कि हमारे पास इलाज तक के पैसे नहीं। तारीफों से घर नहीं चलता। हम आज भी अपनी आर्थिक मजबूरियों की सुरंग में फंसे हैं

 



फिरोज कुरैशी यूपी के कासगंज के रहने वाले हैं और देश के जाने-माने रैट माइनर्स में शामिल हैं। रैट माइनर्स वे मजदूर होते हैं, जो चूहों की तरह बेहद संकरी जगहों में घुसकर हाथों से सुरंग खोदते हैं। जहां बड़ी-बड़ी मशीनें फेल हो जाती हैं, वहीं ये लोग अपनी जान जोखिम में डालकर फंसे लोगों को बाहर निकालते हैं।

फिरोज बताते हैं कि पढ़ाई न होने के कारण उन्होंने मुंबई में जमीन के नीचे पाइपलाइन और सुरंग बनाने का काम सीखा। यह काम इतना खतरनाक है कि कई देशों में इस पर प्रतिबंध है। जहरीली गैस, करंट और पानी के बीच 8 से 18 घंटे लगातार काम करना पड़ता है। कई बार आंखों के सामने साथी मजदूरों की मौत तक देखनी पड़ी।

उत्तराखंड के सिलक्यारा सुरंग हादसे में जब सारी मशीनें नाकाम हो गईं, तब फिरोज और उनकी टीम ने 17 दिन बाद 41 मजदूरों को जिंदा बाहर निकाला। इस कामयाबी के बाद उन्हें राष्ट्रपति से बधाई पत्र मिला, टीवी शो में बुलाया गया और फिल्मी सितारों से मुलाकात हुई। विदेशी प्रोडक्शन हाउस ने उन पर डॉक्यूमेंट्री भी बनाई, लेकिन हालात नहीं बदले।

तेलंगाना सुरंग हादसे में आठ मजदूर दब गए थे। वहां फिरोज की टीम ने दो शव निकाले, लेकिन सुरक्षा कारणों से आगे जाने की इजाजत नहीं मिली। एक बुजुर्ग महिला, जो अपने पति के शव की उम्मीद में सुरंग के बाहर रोती रहीं, आज भी फिरोज को कचोटती है।

राजस्थान के कोटपूतली में बोरवेल में गिरी तीन साल की बच्ची को भी उनकी टीम को बचाने नहीं दिया गया और बच्ची की जान चली गई।

फिरोज कहते हैं, “हम हीरो कहलाते हैं, पर हकीकत ये है कि हमारे पास इलाज तक के पैसे नहीं। तारीफों से घर नहीं चलता। हम आज भी अपनी आर्थिक मजबूरियों की सुरंग में फंसे हैं।”

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